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बेख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना / Bekhud Kiye Dete Hain Andaz-e-Hijabana

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना आ दिल में तुझे रख लूँ, ऐ जल्वा-ए-जानाना ! इतना तो करम करना, ऐ चश्म-ए-करीमाना ! जब जान लबों पर हो, तुम सामने आ जाना क्यूँ आँख मिलाई थी, क्यूँ आग लगाई थी अब रुख़ को छुपा बैठे कर के मुझे दीवाना जी चाहता है तोहफ़े में भेजूँ मैं उन्हें आँखें दर्शन का तो दर्शन हो, नज़राने का नज़राना क्या लुत्फ़ हो महशर में, क़दमों में गिरूँ उन के सरकार कहें देखो, दीवाना है दीवाना ! क्या लुत्फ़ हो महशर में मैं शिकवे किए जाऊँ वो हँस के कहे जाएँ दीवाना है दीवाना मैं होश-ओ-हवास अपने इस बात पे खो बैठा जब तू ने कहा हँस के, आया मेरा दीवाना पीने को तो पी लूँगा, पर 'अर्ज़ ज़रा सी है अजमेर का साक़ी हो, बग़दाद का मय-ख़ाना बेदम ! मेरी क़िस्मत में चक्कर हैं इसी दर के छूटा है न छूटेगा मुझ से दर-ए-जानाना साक़ी तेरे आते ही ये जोश है मस्ती का शीशे पे गिरा शीशा, पैमाने पे पैमाना मा'लूम नहीं, बेदम ! मैं कौन हूँ और क्या हूँ यूँ अपनों में अपना हूँ, बेगानों में बेगाना शायर: बेदम शाह वारसी ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी अमजद साबरी हाफ़िज़ अहमद रज़ा क़ादरी ...

करम माँगता हूँ अता माँगता हूँ | इलाही मैं तुझ से दुआ माँगता हूँ / Karam Mangta Hoon Ata Mangta Hoon | Ilahi Main Tujh Se Dua Mangta Hoon

करम माँगता हूँ, 'अता माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ 'अता कर तू शान-ए-करीमी का सदक़ा 'अता कर दे शान-ए-रहीमी का सदक़ा न माँगूँगा तुझ से तो माँगूँगा किस से ? तेरा हूँ, मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ करम माँगता हूँ, 'अता माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ जो मुफ़्लिस हैं उन को तू दौलत 'अता कर जो बीमार हैं उन को सेहत 'अता कर मरीज़ों की ख़ातिर शिफ़ा माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ करम माँगता हूँ, 'अता माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ मेरी जो बहन भी कुँवारी है, मौला ! उसे नेक रिश्ता 'अता कर दे, मौला ! मैं सदक़ा-ए-ज़हरा सदा माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ करम माँगता हूँ, 'अता माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ जो नादार हैं, कुछ नहीं जिन के पल्ले उन्हें भी दिखा दे हरम के तू जल्वे हुज़ूरी हो सब की, दु'आ माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ करम माँगता हूँ, 'अता माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ वतन के भड़कते...

जिस ने मदीने जाणा कर लो तैयारियाँ | Jis Ne Madine Jana Kar Lo Taiyarian

जिस ने मदीने जाणा कर लो तय्यारियाँ बेड़ा मदीने वाला लैंदा प्या तारियाँ हाजियाँ नें उठ सवेरे, बेह के रौज़े दे नेड़े रो रो के सोहणे अगे 'अर्ज़ां गुज़ारियाँ हाजियाँ नें चुम्मी जाली, जाली ओ कर्मां वाली लख पहरेदाराँ पाँवें छड़ियाँ नें मारियाँ शाला ओ दिन वी आवे, सोहणा सानूँ कोल बुलावे रल मिल के वेखन रौज़ा ऐ सय्याँ सारियाँ ! आब-ए-ज़मज़म मैं पीवाँ, ओथे मैं मराँ ते जीवाँ सदक़ा नवासयाँ दा सुन मेरियाँ ज़ारियाँ ओथे नें ठंडियाँ छावाँ, दिलकश मख़्मूर हवावाँ खुलियाँ बहिश्ताँ दियाँ जीवें सब बारियाँ का'बे दे गिर्द घुमिए, रौज़े दी जाली चुमिए तक आइए जन्नत दियाँ नाले कियारियाँ सोहणे नूँ राज़ी करिए, रहमत थीं झोली भरिए पलकाँ दे नाल दिए थाँ थाँ बहारियाँ रब दा हबीब ओथे, सब दा तबीब ओथे हुंदियाँ मदीने जा के दूर बीमारियाँ सदमें क्यूँ हिज्र दे सहिए, एथे इक पल न रहिए वस जे चल्ले जाइए मार उडारियाँ सूरत नूरानी जिस दी, दुनिया दीवानी जिस दी क्यूँ न मैं जावाँ, हाफ़िज़ ! उस तों बलिहारियाँ ना'त-ख़्वाँ: अमजद साबरी मुहम्मद राशीद आज़म ओवैस रज़ा क़ादरी यूसुफ़ मेमन jis ne madine jaana kar lo ...

हर देश में गूँजेगा अब या रसूलल्लाह / Har Desh Mein Gunjega Ab Ya Rasoolallah

फ़िदाका, या रसूलल्लाह ! फ़िदाका, या रसूलल्लाह ! फ़िदाका, या रसूलल्लाह ! फ़िदाका, या रसूलल्लाह ! लब्बैक ! लब्बैक ! लब्बैक लब्बैक लब्बैक ! लब्बैक ! लब्बैक ! लब्बैक लब्बैक लब्बैक ! हम सर पे कफ़न बाँधे मैदान में निकले हैं बातिल के महलों को हम ढाने निकले हैं हिम्मत है हमें टोको, दम है तो हमें रोको हम ना'रा-ए-रिसालत को फैलाने निकले हैं ना'रा-ए-रिसालत ! या रसूलल्लाह ! ना'रा-ए-रिसालत ! या रसूलल्लाह ! हर देश में गूँजेगा अब या रसूलल्लाह हर शख़्स पुकारेगा अब या रसूलल्लाह हम सारी दुनिया में हलचल सी मचा देंगे सरकार के 'आशिक़ हैं, रंग अपना जमा देंगें हर देश में गूँजेगा अब या रसूलल्लाह हर देश में गूँजेगा अब या रसूलल्लाह मीलाद-ए-नबी करना ये ख़ून में शामिल है इस मिशन की ख़ातिर हम दिन-रात लगा देंगे हर देश में गूँजेगा अब या रसूलल्लाह हर देश में गूँजेगा अब या रसूलल्लाह सरकार की ना'तों से पुर-जोश हैं दीवानें मीलाद की महफ़िल में माहौल बना देंगे सारा जहाँ फ़िदा है, मीलाद-ए-मुस्तफ़ा है हर कोई कह रहा है, मीलाद-ए-मुस्तफ़ा है सरकार की आमद ! मरहबा ! दिलदार की आमद ! मरहबा ! आक़ा की...

या मुहम्मद नूर-ए-मुजस्सम या हबीबी या मौलाई / Ya Muhammad Noor-e-Mujassam Ya Habibi Ya Maulai

या मुहम्मद नूर-ए-मुजस्सम ! या हबीबी ! या मौलाई ! तस्वीर-ए-कमाल-ए-मोहब्बत, तनवीर-ए-जमाल-ए-ख़ुदाई तेरा वस्फ़ बयाँ हो किस से, तेरी कौन करेगा बड़ाई इस गर्द-ए-सफ़र में गुम है जिब्रील-ए-अमीं की रसाई तेरी एक नज़र के तालिब, तेरे एक सुख़न पर क़ुर्बां ये सब तेरे दीवाने, ये सब तेरे शैदाई ये रंग-ए-बहार-ए-गुलशन, ये गुल और गुल का जोबन तेरे नूर-ए-क़दम का धोवन, उस धोवन की रा'नाई मा अज्मलका तेरी सूरत, मा अह़सनका तेरी सीरत मा अक्मलका तेरी 'अज़मत, तेरी ज़ात में गुम है ख़ुदाई ए मज़हर-ए-शान-ए-जमाली ! ए ख़्वाजा-ओ-बंदा-ए-'आली ! मुझे हश्र में काम आ जाए मेरा ज़ौक़-ए-सुख़न-आराई तू रईस-ए-रोज़-ए-शफ़ा'अत, तू अमीर-ए-लुत्फ़-ओ-'इनायत है अदीब को तुझ से निस्बत, ये ग़ुलाम है तू आक़ाई शायर: अदीब रायपुरी ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी महमूद-उल-हसन अशरफ़ी अमजद साबरी ya muhammad noor-e-mujassam ! ya habeebi ! ya maulaai ! tasweer-e-kamaal-e-mohabbat tanweer-e-jamaal-e-KHudaai tera wasf bayaa.n ho kis se teri kaun karega ba.Daai is gard-e-safar me.n gum hai jibreel-e-amee.n ki ra...

मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो री | मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो रे / More Angna Moinuddin Aayo Ri | More Angna Moinuddin Aayo Re

मोरे अंगना मो'ईनुद्दीन आयो री मोरे अंगना मो'ईनुद्दीन आयो री ख़्वाजा पिया हैं जग उजियारे आल-ए-नबी, ज़हरा के दुलारे जान-ए-'अली हैं ख़्वाजा, इब्न-ए-सख़ी हैं मोरे अंगना मो'ईनुद्दीन आयो री मोरे अंगना मो'ईनुद्दीन आयो री आज मोरे घर धूम मची है ख़्वाजा पिया की शादी रची है दूल्हा बने हैं ख़्वाजा-उस्माँ के प्यारे मोरे अंगना मो'ईनुद्दीन आयो री मोरे अंगना मो'ईनुद्दीन आयो री ख़्वाजा क़ुतुब हैं आज यहाँ पर झूम रहे हैं सारे क़लंदर बाबा फ़रीद भी आए हुए हैं मोरे अंगना मो'ईनुद्दीन आयो री मोरे अंगना मो'ईनुद्दीन आयो री मन में ख़ुशी के फूल खिले हैं आज मोहे मोरे ख़्वाजा मिले हैं ख़ुशियाँ मनाओ, सखियो ! झूम के गाओ मोरे अंगना मो'ईनुद्दीन आयो री मोरे अंगना मो'ईनुद्दीन आयो री सोने का दियारा मैं चौमुख बारूँ अपने ख़्वाजा के मैं तन मन वारूँ आयो री आयो, मोरे भाग जगायो मोरे अंगना मो'ईनुद्दीन आयो री मोरे अंगना मो'ईनुद्दीन आयो री ना'त-ख़्वाँ: अमजद साबरी साजिद क़ादरी more angna mo'inuddin aayo ri more angna mo'inuddin aayo ri KHwaja...

मैं नज़्र करूँ जान-ओ-जिगर, कैसा लगेगा ! / Main Nazr Karoon Jaan-o-Jigar, Kaisa Lagega !

मैं नज़्र करूँ जान-ओ-जिगर, कैसा लगेगा ! रख दूँ दर-ए-सरकार पे सर, कैसा लगेगा ! आ जाएँ मुक़द्दर से शह-ए-दीं जो मेरे घर मैं कैसा लगूँगा ! मेरा घर कैसा लगेगा ! जब दूर से है इतना हसीं गुंबद-ए-ख़ज़रा इस पार है ऐसा तो उधर कैसा लगेगा ! ग़ौस-उल-वरा से पूछ ले इक रोज़ ये चल कर बग़दाद से तयबा का सफ़र कैसा लगेगा ! आ जाए तड़प के जो कहीं शेर-ए-बरेली रूबाहों में वो शेर-ए-बबर कैसा लगेगा ! नात-ख़्वाँ: असद इक़बाल mai.n nazr karu.n jaan-o-jigar, kaisa lagega ! rakh du.n dar-e-sarkaar pe sar, kaisa lagega ! aa jaae.n muqaddar se shah-e-dee.n jo mere ghar mai.n kaisa lagunga ! mera ghar kaisa lagega ! jab door se hai itna hasee.n gumbad-e-KHazra is paar hai aisa to udhar kaisa lagega ! Gaus-ul-wara se poochh le ik roz ye chal kar baGdaad se tayba ka safar kaisa lagega ! aa jaae ta.Dap ke jo kahi.n sher-e-bareli roobaaho.n me.n wo sher-e-babar kaisa lagega ! Naat-Khwaan: Asad Iqbal Main Nazar Karun Jaan o Jigar Kaisa Lagega Lyrics, Main Nazar Karun Jaano Jigar Kaisa Lagega Lyrics,...

तयबा के जाने वाले ! जा कर बड़े अदब से / Tayba Ke Jaane Waale ! Jaa Kar Bade Adab Se

तयबा के जाने वाले ! जा कर बड़े अदब से मेरा भी क़िस्सा-ए-ग़म कहना शह-ए-'अरब से कहना कि, शाह-ए-'आली ! इक रंज-ओ-ग़म का मारा दोनों जहाँ में इस का हैं आप ही सहारा हालात-ए-पुर-अलम से हर दम गुज़र रहा है और काँपते लबों से फ़रियाद कर रहा है बार-ए-गुनाह अपना है दोश पर उठाए कोई नहीं है ऐसा जो पूछने को आए भटका हुआ मुसाफ़िर मंज़िल को ढूँडता है तारीकियों में माह-ए-कामिल को ढूँडता है सीने में है अँधेरा, दिल है सियाह-ख़ाना ये सब मेरी हक़ीक़त सरकार को सुनाना कहना मेरे नबी से, महरूम हूँ ख़ुशी से सर पर इक अब्र-ए-ग़म है, अश्क़ों से आँख नम है पामाल-ए-ज़िंदगी हूँ, सरकार ! उम्मती हूँ उम्मत के रहनुमा हो, कुछ 'अर्ज़-ए-हाल सुन लो फ़रियाद कर रहा हूँ, मैं दिल-फ़िगार कब से मेरा भी क़िस्सा-ए-ग़म कहना शह-ए-'अरब से तयबा के जाने वाले ! जा कर बड़े अदब से मेरा भी क़िस्सा-ए-ग़म कहना शह-ए-'अरब से कहना कि खा रहा हूँ मैं ठोकरें जहाँ में तुम ही बताओ, आक़ा ! जाऊँ भला कहाँ मैं महसूस कर रहा हूँ, दुनिया है एक धोका मतलब के यार हैं सब, कोई नहीं किसी का किस को मैं अपना जानूँ, किस का मैं लूँ सहारा मुझ को तो,...

अँधेरे में दिल के चराग़-ए-मोहब्बत ये किस ने जलाया सवेरे सवेरे / Andhere Mein Dil Ke Charaagh-e-Mohabbat Ye Kis Ne Jalaaya Sawere Sawere

अँधेरे में दिल के चराग़-ए-मोहब्बत ये किस ने जलाया सवेरे सवेरे लिया जब से मैंने ये नाम-ए-मुहम्मद, बड़ा लुत्फ़ आया सवेरे सवेरे ख़याल-ए-मदीना में नींद आ गई जब, क़रार आ गया बे-क़रारी को मेरी किए सब्ज़-गुम्बद के मैंने नज़ारे, बड़ा लुत्फ़ आया सवेरे सवेरे अँधेरे में दिल के चराग़-ए-मोहब्बत ये किस ने जलाया सवेरे सवेरे लिया जब से मैंने ये नाम-ए-मुहम्मद, बड़ा लुत्फ़ आया सवेरे सवेरे 'अक़ीदत की मंज़िल का बस राज़ है ये, 'इशा के वुज़ू से अदा हो सहर भी 'इबादत का सौदा अँधेरे अँधेरे, मुनाफ़ा' कमाया सवेरे सवेरे अँधेरे में दिल के चराग़-ए-मोहब्बत ये किस ने जलाया सवेरे सवेरे लिया जब से मैंने ये नाम-ए-मुहम्मद, बड़ा लुत्फ़ आया सवेरे सवेरे ख़ुदा की क़सम ! ये हक़ीक़त है सहरा की बे-नूर आँखों में भी नूर चमका तेरे सब्ज़-गुम्बद ने सूरज की किरनों को जो जगमगाया सवेरे सवेरे अँधेरे में दिल के चराग़-ए-मोहब्बत ये किस ने जलाया सवेरे सवेरे लिया जब से मैंने ये नाम-ए-मुहम्मद, बड़ा लुत्फ़ आया सवेरे सवेरे नात-ख़्वाँ: इमरान शैख़ अत्तारी andhere me.n dil ke charaaG-e-Mohabbat ye kis ne jalaaya sawere sawere liya ja...

ताजदार-ए-हरम ! हो निगाह-ए-करम / Tajdar-e-Haram ! Ho Nigah-e-Karam

क़िस्मत में मेरी चैन से जीना लिख दे डूबे न कभी मेरा सफ़ीना लिख दे जन्नत तो ठिकाना है मगर दुनिया में ऐ कातिब-ए-तक़दीर मदीना लिख दे ताजदार-ए-हरम ! हो निगाह-ए-करम हम ग़रीबों के दिन भी सँवर जाएंगे हामि-ए-बे-कसां ! क्या कहेगा जहाँ आप के दर से ख़ाली अगर जाएंगे ताजदार-ए-हरम ! हो निगाह-ए-करम हम ग़रीबों के दिन भी सँवर जाएंगे ताजदार-ए-हरम ! ताजदार-ए-हरम ! चश्मे-रहमत बकुशा सूए मनन्दाज़े-नज़र ऐ कुरैशी लक़ब-ओ-हाशमी-ओ-मुत्तलबी ताजदार-ए-हरम ! हो निगाह-ए-करम हम ग़रीबों के दिन भी सँवर जाएंगे ताजदार-ए-हरम ! ताजदार-ए-हरम ! का तुमसे कहूं ऐ अरब के कुंवर तुम जानत हो मन की बतियां दर फुरक़ते-तो ऐ उम्मी लक़ब काटे न कटत हैं अब रतियां तोरी प्रीत में सुध-बुध सब बिसरी कब तक ये रहेगी बेख़बरी गाहे बफ़िगन दुज़दीदा नज़र कभी सुन भी तो लो हमरी बतियां ताजदार-ए-हरम ! हो निगाह-ए-करम हम ग़रीबों के दिन भी सँवर जाएंगे ताजदार-ए-हरम ! ताजदार-ए-हरम ! ख़ौफ़-ए-तूफ़ान है, बिजलियों का है डर सख़्त मुश्किल है आक़ा ! किधर जाएं हम आप ही गर न लेंगे हमारी ख़बर हम मुसीबत के मारे किधर जाएंगे   ताजदार-ए-हरम ! हो निगाह-ए-कर...

मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा / Mera Koi Nahin Hai Tere Siwa

कोई नहीं, मेरा कोई नहीं कोई नहीं, मेरा कोई नहीं जो कुछ भी मांगना है दरे-मुस्तफ़ा से मांग अल्लाह के हबीब शहे-अम्बिया से मांग अब तक कहां अंधेरो में भटका हुआ था तू गर रोशनी की चाह है नूरे-ख़ुदा से मांग मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा मैं बन के सवाली आया हूँ मैं झोली ख़ाली लाया हूँ मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा मुझे नज़रे-करम की भीक मिले मुझे नज़रे-करम की भीक मिले आक़ा! भीक मिले, आक़ा! भीक मिले आक़ा! भीक मिले करम की भीक अता हो गुनाहगारों को सहारा दीजिये सरकार बे-सहारों को भीक मिले, आक़ा! भीक मिले आक़ा! भीक मिले, आक़ा! भीक मिले अगर हुज़ूर की रहमत का आसरा हो जाए ज़माने में मुझे जीने का हौसला हो जाए आक़ा! भीक मिले, आक़ा! भीक मिले आक़ा! भीक मिले गर तुम न सुनोगे तो मेरी कौन सुनेगा गर तुम न करोगे तो करम कौन करेगा आक़ा! भीक मिले, आक़ा! भीक मिले आक़ा! भीक मिले ख़ुद भीक देके केहते हैं मंगतों की ख़ैर हो ऐसा सख़ी दरबार तो देखा नहीं कोई आक़ा! भीक मिले, आक़ा! भीक मिले आक़ा! भीक मिले मुझे नज़रे-करम की भीक मिले मैं झोली ख़ाली लाया हूँ मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा म...